Cave

Reflection hid in plain sight
Everywhere and everywhen
Mirthless shadow of a desire gone by
Grows beyond the cerebral frame
Some silence celestial
Others storms brave
Yet mirrors fortune the sane
From all.places to be
In thunder, lighting, and rain…

***

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ज़िन्दगी के खोये पन्नो से

हां! देखा है मैंने गहराई के कुएं में
रह रह कर वो चीख सुनाई देती है
किसी रोज़ दिया मैंने जिसे आकर था

भूल गए थे वो पुकार
दिल में कहीं दफना बैठे थे
सोचा था की आईना झुठ है

हाँ! तोले हैं मैंने बराबर
दर्द से भरे सच
और प्यार से सने झूठ

हाँ! टूटा हूँ बार बार
कठोर पत्थर की मार
और झरने की बौछार

खो मत जाना कहीं, ओ राही
पिरोते हुए इन शब्दों की माला
जुड़े हैं तार इतने
बाँधी हैं गांठें क्यों?

आईना है यहीं
सुन्दर हूँ मैं
सुन्दर हो तुम
सच और झूठ का पता नहीं

जीना है ज़रूर
सीखे हैं यही
शांत आनंद में रहना

***